श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 3: यमराज द्वारा अपने दूतों को आदेश  »  श्लोक 5

 
श्लोक
यदि स्युर्बहवो लोके शास्तारो दण्डधारिण: ।
कस्य स्यातां न वा कस्य मृत्युश्चामृतमेव वा ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
यदि—यदि; स्यु:—हैं; बहव:—अनेक; लोके—इस जगत में; शास्तार:—शासक या नियंत्रक; दण्ड-धारिण:—पापी लोगों को दण्ड देने वाले; कस्य—किसका; स्याताम्—हो सकता है; न—नहीं; वा—अथवा; कस्य—किसका; मृत्यु:— कष्ट या दुख; च—तथा; अमृतम्—सुख; एव—निश्चय ही; वा—अथवा ।.
 
अनुवाद
 
 यदि इस ब्रह्माण्ड में अनेक शासक तथा न्यायकर्ता हैं, जो दण्ड तथा पुरस्कार के विषय में मतभेद रखते हों, तो उनके विरोधी कार्य एक दूसरे को प्रभावहीन कर देंगे और न तो कोई दण्डित होगा न पुरस्कृत होगा। अन्यथा, यदि उनके विरोधी कार्य एक दूसरे को प्रभावहीन नहीं कर पाते तो हर एक को दण्ड तथा पुरस्कार दोनों ही देने होंगे।
 
तात्पर्य
 चूँकि यमदूत यमराज के आदेश को पूरा करने में असफल रहे थे, अत: उन्होंने संदेह व्यक्त किया कि यमराज में पापी को दण्ड देने की शक्ति है भी कि नहीं? यद्यपि वे यमराज के आदेशानुसार अजामिल को बन्दी बनाने गये थे, किन्तु उन्होंने किसी उच्चतर अधिकारी के आदेश के कारण अपने आपको असफल पाया। इसलिए वे इस बारे में अनिश्चित थे कि अधिकारी अनेक हैं या केवल एक। यदि कई अधिकारी हों जो विभिन्न निर्णय दें जो परस्पर विरोधी हों तो कोई व्यक्ति या तो गलत दण्ड या पुरस्कार पा सकता है या फिर वह न तो दण्डित होगा न पुरस्कृत। भौतिक जगत में हमारे अनुभव के अनुसार एक न्यायालय द्वारा दण्डित व्यक्ति दूसरे न्यायालय में याचिका दे सकता है। इस तरह वही व्यक्ति विभिन्न निर्णयों के अनुसार दण्डित या पुरस्कृत किया जा
सकता हैं। किन्तु प्रकृति के कानून में या पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् के न्यायालय में ऐसे परस्पर विरोधी निर्णय नहीं हो सकते। न्यायकर्ताओं तथा उनके निर्णयों को पूर्ण तथा विरोधों से मुक्त होना चाहिए। वस्तुत: अजामिल के मामले में यमराज की स्थिति अतीव विषम थी, क्योंकि अजामिल को बन्दी बनाने में यमदूत सही थे, किन्तु विष्णुदूतों ने उन्हें निष्फल कर दिया था। यद्यपि इन परिस्थितियों में यमराज पर विष्णुदूत तथा यमदूत दोनों ही दोषारोपण कर रहे थे, किन्तु न्याय करने में वे पूर्ण हैं, क्योंकि उन्हें पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् से शक्ति प्राप्त है। अतएव वे बतायेंगे कि उनकी सही स्थिति क्या है और हर व्यक्ति किस तरह परम नियन्ता पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥