श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 5: प्रजापति दक्ष द्वारा नारद मुनि को शाप  »  श्लोक 34

 
श्लोक
एतस्मिन् काल उत्पातान् बहून् पश्यन् प्रजापति: ।
पूर्ववन्नारदकृतं पुत्रनाशमुपाश‍ृणोत् ॥ ३४ ॥
 
शब्दार्थ
एतस्मिन्—इस; काले—समय में; उत्पातान्—उत्पात; बहून्—अनेक; पश्यन्—देखकर; प्रजापति:—प्रजापति दक्ष ने; पूर्व-वत्—पहले की तरह; नारद—नारद मुनि द्वारा; कृतम्—किया हुआ; पुत्र-नाशम्—अपने पुत्रों की क्षति; उपाशृणोत्—सुना ।.
 
अनुवाद
 
 इस समय प्रजापति दक्ष ने अनेक अपशकुन देखे और विविध स्रोतों से सुना कि उनके पुत्रों की दूसरी टोली, सवलाश्वों, ने नारद मुनि के उपदेशों के अनुसार अपने ज्येष्ठ भाइयों के ही मार्ग का अनुसरण किया है।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥