श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 10-11

 
श्लोक
सङ्कल्पायास्तु सङ्कल्प: काम: सङ्कल्पज: स्मृत: ।
वसवोऽष्टौ वसो: पुत्रास्तेषां नामानि मे श‍ृणु ॥ १० ॥
द्रोण: प्राणो ध्रुवोऽर्कोऽग्निर्दोषो वास्तुर्विभावसु: ।
द्रोणस्याभिमते: पत्‍न्या हर्षशोकभयादय: ॥ ११ ॥
 
शब्दार्थ
सङ्कल्पाया:—संकल्पा के गर्भ से; तु—लेकिन; सङ्कल्प:—संकल्प; काम:—काम; सङ्कल्प-ज:—संकल्प का पुत्र; स्मृत:—विख्यात; वसव: अष्टौ—आठों वसु; वसो:—वसु के; पुत्रा:—पुत्र; तेषाम्—उनके; नामानि—नाम; मे—मुझसे; शृणु—सुनो; द्रोण:—द्रोण; प्राण:—प्राण; ध्रुव:—ध्रुव; अर्क:—अर्क; अग्नि:—अग्नि; दोष:—दोष; वास्तु:—वास्तु; विभावसु:—विभावसु; द्रोणस्य—द्रोण के; अभिमते:—अभिमति से; पत्न्या:—पत्नी; हर्ष-शोक-भय-आदय:—हर्ष, शोक, भय आदि नाम वाले पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 संकल्पा का पुत्र संकल्प कहलाया जिससे काम की उत्पत्ति हुई। वसु के पुत्र अष्ट वसु कहलाये। उनके नाम सुनो—द्रोण, प्राण, ध्रुव, अर्क, अग्नि, दोष, वास्तु तथा विभावसु। द्रोण नामक वसु की पत्नी अभिमति से हर्ष, शोक, भय इत्यादि पुत्रों का जन्म हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥