श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 13

 
श्लोक
अर्कस्य वासना भार्या पुत्रास्तर्षादय: स्मृता: ।
अग्नेर्भार्या वसोर्धारा पुत्रा द्रविणकादय: ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
अर्कस्य—अर्क की; वासना—वासना; भार्या—पत्नी; पुत्रा:—कई पुत्र; तर्ष-आदय:—तर्ष इत्यादि; स्मृता:—विख्यात; अग्ने:—अग्नि की; भार्या—पत्नी; वसो:—वसु की; धारा—धारा; पुत्रा:—पुत्र; द्रविणक-आदय:—द्रविणक इत्यादि ।.
 
अनुवाद
 
 अर्क की पत्नी वासना के गर्भ से कई पुत्र उत्पन्न हुए जिनमें तर्ष प्रमुख था। अग्नि नामक वसु की पत्नी धारा से द्रविणक इत्यादि कई पुत्र उत्पन्न हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥