श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 15

 
श्लोक
वास्तोराङ्गिरसीपुत्रो विश्वकर्माकृतीपति: ।
ततो मनुश्चाक्षुषोऽभूद् विश्वे साध्या मनो: सुता: ॥ १५ ॥
 
शब्दार्थ
वास्तो:—वास्तु; आङ्गिरसी—आंगिरसी नामक पत्नी से; पुत्र:—पुत्र; विश्वकर्मा—विश्वकर्मा; आकृती-पति:—आकृती का पति; तत:—उससे; मनु: चाक्षुष:—मनु जिनका नाम चाक्षुष है; अभूत्—उत्पन्न हुआ; विश्वे—विश्वदेवगण; साध्या:— साध्यगण; मनो:—मनु के; सुता:—पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 वास्तु नामक वसु की पत्नी आंगिरसी से महान् शिल्पी विश्वकर्मा का जन्म हुआ। विश्वकर्मा आकृती के पति बने जिनसे चाक्षुष मनु ने जन्म ग्रहण किया। मनु के पुत्र विश्वदेव तथा साध्यगण कहलाये।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥