श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 16

 
श्लोक
विभावसोरसूतोषा व्युष्टं रोचिषमातपम् ।
पञ्चयामोऽथ भूतानि येन जाग्रति कर्मसु ॥ १६ ॥
 
शब्दार्थ
विभावसो:—विभावसु के; असूत—उत्पन्न हुए; ऊषा—उषा; व्युष्टम्—व्युष्ट; रोचिषम्—रोचिष; आतपम्—आतप; पञ्चयाम:—पंचयाम; अथ—तत्पश्चात्; भूतानि—जीवात्माएँ; येन—जिसके द्वारा; जाग्रति—जाग्रित होते हैं; कर्मसु— भौतिक कार्यों में ।.
 
अनुवाद
 
 विभावसु की पत्नी ऊषा के तीन पुत्र उत्पन्न हुए—व्युष्ट, रोचिष तथा आतप। इनमें से आतप के पञ्चयाम (दिन) उत्पन्न हुआ जो समस्त जीवात्माओं को भौतिक कार्यों के लिए प्रेरित करता है।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥