श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 19

 
श्लोक
प्रजापतेरङ्गिरस: स्वधा पत्नी पितृनथ ।
अथर्वाङ्गिरसं वेदं पुत्रत्वे चाकरोत् सती ॥ १९ ॥
 
शब्दार्थ
प्रजापते: अङ्गिरस:—अंगिरा नामक अन्य प्रजापति को; स्वधा—स्वधा; पत्नी—पत्नी; पितृन्—पितरगण; अथ— तत्पश्चात्; अथर्व-आङ्गिरसम्—अथर्वांगिरस; वेदम्—साक्षात् वेद; पुत्रत्वे—पुत्र के रूप में; च—तथा; अकरोत्—स्वीकार किया; सती—सती ने ।.
 
अनुवाद
 
 प्रजापति अंगिरा के दो पत्नियाँ थीं—स्वधा तथा सती। स्वधा ने समस्त पितरों को पुत्र रूप में स्वीकार किया और सती ने अथर्वांगिरस वेद को ही पुत्र रूप में स्वीकार कर लिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥