श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 20

 
श्लोक
कृशाश्वोऽर्चिषि भार्यायां धूमकेतुमजीजनत् ।
धिषणायां वेदशिरो देवलं वयुनं मनुम् ॥ २० ॥
 
शब्दार्थ
कृशाश्व:—कृशाश्व; अर्चिषि—अर्चिस; भार्यायाम्—अपनी पत्नी से; धूमकेतुम्—धूमकेतु को; अजीजनत्—जन्म दिया; धिषणायाम्—धिषणा नामक पत्नी से; वेदशिर:—वेदशिरा; देवलम्—देवल; वयुनम्—वयुन; मनुम्—मनु ।.
 
अनुवाद
 
 कृश्वाश्व के अर्चिस् तथा धिषणा नामक दो पत्नियाँ थीं। अर्चिस् से धूमकेतु और धिषणा से वेदशिरा, देवल, वयुन तथा मनु नामक चार पुत्र उत्पन्न हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥