श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 24-26

 
श्लोक
पुन: प्रसाद्य तं सोम: कला लेभे क्षये दिता: ।
श‍ृणु नामानि लोकानां मातृणां शङ्कराणि च ॥ २४ ॥
अथ कश्यपपत्नीनां यत्प्रसूतमिदं जगत् ।
अदितिर्दितिर्दनु: काष्ठा अरिष्टा सुरसा इला ॥ २५ ॥
मुनि: क्रोधवशा ताम्रा सुरभि: सरमा तिमि: ।
तिमेर्यादोगणा आसन् श्वापदा: सरमासुता: ॥ २६ ॥
 
शब्दार्थ
पुन:—फिर; प्रसाद्य—प्रसन्न करके; तम्—उसको (प्रजापति दक्ष को); सोम:—चन्द्रदेव; कला:—प्रकाश के अंश; लेभे—प्राप्त किया; क्षये—क्रमिक ह्रास में (कृष्ण पक्ष); दिता:—हटा दिया; शृणु—सुनो; नामानि—सभी नामों; लोकानाम्—लोकों के; मातृणाम्—माताओं के; शङ्कराणि—मंगलकारी; च—तथा; अथ—अब; कश्यप-पत्नीनाम्— कश्यप की पत्नियों के; यत्-प्रसूतम्—जिनसे उत्पन्न; इदम्—यह; जगत्—सारा ब्रह्माण्ड; अदिति:—अदिति; दिति:— दिति; दनु:—दनु; काष्ठा—काष्ठा; अरिष्टा—अरिष्टा; सुरसा—सुरसा; इला—इला; मुनि:—मुनि; क्रोधवशा—क्रोधवशा; ताम्रा—ताम्रा; सुरभि:—सुरभि; सरमा—सरमा; तिमि:—तिमि; तिमे:—तिमि से; याद:-गणा:—जलचर; आसन्—प्रकट हुए; श्वापदा:—सिंह तथा बाघ जैसे हिंसक पशु; सरमा-सुता:—सरमा के पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 तत्पश्चात् चन्द्रदेव ने प्रजापति को विनीत वचनों के द्वारा प्रसन्न करके रुग्णावस्था में क्षीण हुए प्रकाश को फिर से प्राप्त कर लिया, किन्तु तो भी उनके कोई सन्तान नहीं हुई। चन्द्रमा कृष्णपक्ष में अपना प्रकाश खो देता है, किन्तु शुक्ल पक्ष में उसे पुन: प्राप्त कर लेता है। हे राजा परीक्षित! अब मुझसे कश्यप की पत्नियों के नाम सुनो, जिनके गर्भ से इस समस्त ब्रह्माण्ड के प्राणी उत्पन्न हुए हैं। वे लगभग समस्त ब्रह्माण्ड के सचराचर की माताएँ हैं और उनके नामों को सुनना शुभ है। उनके नाम हैं—अदिति, दिति, दनु, काष्ठा, अरिष्टा, सुरसा, इला, मुनि, क्रोधवशा, ताम्रा, सुरभि, सरमा तथा तिमि। तिमि के गर्भ से समस्त जलचर उत्पन्न हुए और सरमा से सिंह तथा बाघ जैसे क्रूर पशु उत्पन्न हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥