श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 27

 
श्लोक
सुरभेर्महिषा गावो ये चान्ये द्विशफा नृप ।
ताम्राया: श्येनगृध्राद्या मुनेरप्सरसां गणा: ॥ २७ ॥
 
शब्दार्थ
सुरभे:—सुरभि के गर्भ से; महिषा:—भैंस; गाव:—गाएँ; ये—जो; च—तथा; अन्ये—अन्य; द्वि-शफा:—फटे खुरों वाले, खुरदार; नृप—हे राजा; ताम्राया:—ताम्रा से; श्येन—बाज, चील्ह; गृध्र-आद्या:—गीध इत्यादि; मुने:—मुनि से; अप्सरसाम्—अप्सराओं के; गणा:—समूह ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजा परीक्षित! सुरभि के गर्भ से भैंस, गाय तथा अन्य फटे खुरों वाले पशु उत्पन्न हुए, जब कि ताम्रा के गर्भ से बाज, गीध तथा अन्य बड़े शिकारी पक्षियों ने जन्म लिया। मुनि से अप्सराएँ उत्पन्न हुईं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥