श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 41

 
श्लोक
छाया शनैश्चरं लेभे सावर्णिं च मनुं तत: ।
कन्यां च तपतीं या वै वव्रे संवरणं पतिम् ॥ ४१ ॥
 
शब्दार्थ
छाया—सूर्यदेव की अन्य पत्नी छाया ने; शनैश्चरम्—शनि को; लेभे—उत्पन्न किया; सावर्णिम्—सावर्णि; च—तथा; मनुम्—मनु को; तत:—उस (विवस्वान्) से; कन्याम्—एक पुत्री; च—भी; तपतीम्—तपती नाम की; या—जो; वै— निस्सन्देह; वव्रे—ब्याह किया; संवरणम्—संवरण को; पतिम्—पति ।.
 
अनुवाद
 
 सूर्य की अन्य पत्नी छाया से शनैश्चर तथा सावर्णि मनु नामक दो पुत्र तथा तपती नामक एक पुत्री उत्पन्न हई जिसने संवरण के साथ विवाह कर लिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥