श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 42

 
श्लोक
अर्यम्णो मातृका पत्नी तयोश्चर्षणय: सुता: ।
यत्र वै मानुषी जातिर्ब्रह्मणा चोपकल्पिता ॥ ४२ ॥
 
शब्दार्थ
अर्यम्ण:—अर्यमा की; मातृका—मातृका; पत्नी—पत्नी; तयो:—उनके संयोग से; चर्षणय: सुता:—अनेक विद्वान पुत्र; यत्र—जिनमें; वै—निस्सन्देह; मानुषी—मनुष्य की; जाति:—जाति; ब्रह्मणा—श्रीब्रह्मा के द्वारा; च—तथा; उपकल्पिता—सृष्टि की गई ।.
 
अनुवाद
 
 अर्यमा की पत्नी मातृका की कुक्षि से कई विद्वान पुत्र उत्पन्न हुए। श्रीब्रह्मा ने उन्हीं में से मनुष्य की जातियों की सृष्टि की जो आत्म-निरीक्षण की प्रवृत्ति से सम्पन्न हैं।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥