श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 5

 
श्लोक
भानोस्तु देवऋषभ इन्द्रसेनस्ततो नृप ।
विद्योत आसील्लम्बायास्ततश्च स्तनयित्नव: ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
भानो:—भानु के गर्भ से; तु—निस्सन्देह; देव-ऋषभ:—देव-ऋषभ; इन्द्रसेन:—इन्द्रसेन; तत:—उस (देवऋषभ) से; नृप—हे राजन्; विद्योत:—विद्योत; आसीत्—उत्पन्न हुआ; लम्बाया:—लम्बा के गर्भ से; तत:—उससे; च—तथा; स्तनयित्नव:—समस्त बादल ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजन्! भानु के गर्भ से देव-ऋषभ नामक एक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसके इन्द्रसेन नाम का एक पुत्र हुआ। लम्बा के गर्भ से विद्योत नामक पुत्र उत्पन्न हुआ जिसने समस्त बादलों को जन्म दिया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥