श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 6

 
श्लोक
ककुद: सङ्कटस्तस्य कीकटस्तनयो यत: ।
भुवो दुर्गाणि यामेय: स्वर्गो नन्दिस्ततोऽभवत् ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
ककुद:—ककुद के गर्भ से; सङ्कट:—संकट; तस्य—उसके; कीकट:—कीकट; तनय:—पुत्र; यत:—जिससे; भुव:— पृथ्वी के; दुर्गाणि—अनेक देवता, इस ब्रह्माण्ड के रक्षक (जिनका नाम दुर्गा है); यामेय:—यमी के; स्वर्ग:—स्वर्ग; नन्दि:—नन्दि; तत:—उस (स्वर्ग) से; अभवत्—उत्पन्न हुआ ।.
 
अनुवाद
 
 ककुद के गर्भ से संकट नाम का पुत्र हुआ जिसके पुत्र का नाम कीकट था। कीकट से दुर्गा नामक देवतागण हुए। यामी के पुत्र का नाम स्वर्ग था जिससे नन्दि नाम का पुत्र उत्पन्न हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥