श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 8

 
श्लोक
मरुत्वांश्च जयन्तश्च मरुत्वत्या बभूवतु: ।
जयन्तो वासुदेवांश उपेन्द्र इति यं विदु: ॥ ८ ॥
 
शब्दार्थ
मरुत्वान्—मरुत्वान; च—भी; जयन्त:—जयन्त; च—तथा; मरुत्वत्या:—मरुत्वती से; बभूवतु:—जन्म लिया; जयन्त:— जयन्त; वासुदेव-अंश:—वासुदेव के अंश स्वरूप; उपेन्द्र:—उपेन्द्र; इति—इस प्रकार; यम्—जिसको; विदु:—जानते हैं ।.
 
अनुवाद
 
 मरुत्वती के गर्भ से मरुत्वान तथा जयन्त नामक दो पुत्रों ने जन्म लिया। जयन्त भगवान् वासुदेव के अंश हैं और उपेन्द्र कहे जाते हैं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥