श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  »  श्लोक 9

 
श्लोक
मौहूर्तिका देवगणा मुहूर्तायाश्च जज्ञिरे ।
ये वै फलं प्रयच्छन्ति भूतानां स्वस्वकालजम् ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
मौहूर्तिका:—मौहूर्तिक गण; देव-गणा:—देवता; मुहूर्ताया:—मुहूर्ता के गर्भ से; च—तथा; जज्ञिरे—जन्म ग्रहण किया; ये—जिन सबों ने; वै—निस्सन्देह; फलम्—फल, परिणाम; प्रयच्छन्ति—प्रदान करते हैं; भूतानाम्—समस्त जीवात्माओं का; स्व-स्व—अपना-अपना; काल-जम्—काल से उत्पन्न ।.
 
अनुवाद
 
 मुहूर्ता के गर्भ से मौहूर्तिकगण नामक देवताओं ने जन्म ग्रहण किया। ये देवता अपने- अपने कालों में जीवात्माओं को उनके कर्मों का फल प्रदान करने वाले हैं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥