श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 6: दक्ष की कन्याओं का वंश  » 

 
संक्षेप विवरण
 
 इस अध्याय में बताया गया है कि प्रजापति दक्ष की पत्नी असिक्नी के गर्भ से साठ पुत्रियाँ उत्पन्न हुईं। जनसंख्या बढ़ाने के उद्देश्य से वे विभिन्न पुरुषों को दान दे दी गईं। नारद मुनि ने दक्ष की इन सन्तानों को स्त्री जाति होने के कारण वैराग्य-जीवन निर्वाह करने का उपदेश नहीं दिया। इस प्रकार इन पुत्रियों को नारदमुनि से बचा लिया गया। इन पुत्रियों में से दस धर्मराज के साथ ब्याह दी गईं, तेरह कश्यप
मुनि को और सत्ताईस चन्द्रदेव को दे दी गईं। इस प्रकार पचास पुत्रियाँ बाँट दी गई। शेष दस पुत्रियों में से चार कश्यप को और दो-दो भूत, अंगिरा तथा कृशाश्व को प्रदान की गईं। यहाँ यह समझ लेना चाहिए कि विभिन्न महापुरुषों के साथ इन साठों कन्याओं के संयोग से ही यह समस्त ब्रह्माण्ड विभिन्न प्रकार की जीवात्माओं से परिपूर्ण हो सका, जिसमें मनुष्य, देवता, असुर, पशु, पक्षी तथा नाग सम्मिलित हैं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥