श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 15: सुसंस्कृत मनुष्यों के लिए उपदेश  »  श्लोक 69

 
श्लोक
अहं पुराभवं कश्चिद्गन्धर्व उपबर्हण: ।
नाम्नातीते महाकल्पे गन्धर्वाणां सुसम्मत: ॥ ६९ ॥
 
शब्दार्थ
अहम्—मैं; पुरा—पूर्वजन्म में; अभवम्—था; कश्चित् गन्धर्व:—गर्न्धलोक के निवासी के रूप में; उपबर्हण:—उपबर्हण; नाम्ना—नाम से; अतीते—बहुत काल पूर्व; महा-कल्पे—ब्रह्मा के जीवन में जो महाकल्प कहलाता है; गन्धर्वाणाम्—गन्धर्वों में; सु-सम्मत:—अत्यन्त सम्मानित व्यक्ति ।.
 
अनुवाद
 
 बहुत समय पूर्व, एक अन्य महाकल्प (ब्रह्मा का युग) में मैं उपबर्हण नामक गन्धर्व के रूप में था। अन्य गन्धर्वों में मेरा अत्यधिक सम्मान था।
 
तात्पर्य
 श्री नारद मुनि अपने विगत जीवन से व्यावहारिक उदाहरण दे रहे हैं। ब्रह्मा के पूर्वजीवन काल में नारदमुनि गन्धर्व लोक के वासी थे, किन्तु दुर्भाग्य से वे गन्धर्व लोक जहां के निवासी अत्यन्त सुन्दर तथा कुशल गायक होते हैं, के इस उच्च स्थान से गिर गये और शूद्र बने, जैसाकि आगे बताया जाएगा। फिर भी भक्तों की संगति करने से वे गन्धर्व लोक से भी अधिक भाग्यवान् निकले। यद्यपि प्रजापतियों ने उन्हें शूद्र बनने का श्राप दिया था, किन्तुे अगले जन्म में वे ब्रह्माजी के पुत्र बने।
श्रील मध्वाचार्य ने महाकल्पे शब्द को अतीत ब्रह्मकल्पे के रूप में ग्रहण किया है। ब्रह्मा की मृत्यु कई लाख वर्षों बाद होती है। ब्रह्मा के एक दिन का वर्णन भगवद्गीता (८.१७) में हुआ है— सहस्रयुगपर्यन्तम् अहर्यद् ब्रह्मणो विदु:।

रात्रिं युगसहस्रान्तां तेऽहोरात्रविदो जना: ॥

“मनुष्य की गणना से ब्रह्मा का एक दिन एक हजार युगों के योग के बराबर होता है। और इतनी ही लम्बी उनकी रात्रि भी होती है।” भगवान् श्रीकृष्ण लाखों वर्ष पूर्व की घटनाओं को स्मरण रख सकते हैं। इसी प्रकार नारद मुनि जैसे उनके शुद्ध भक्त भी लाखों वर्ष पुराना जीवन याद रख सकते हैं।

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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥