श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 7: भगवद्-विज्ञान  »  अध्याय 9: प्रह्लाद द्वारा नृसिंह देव का प्रार्थनाओं से शान्त किया जाना  »  श्लोक 4

 
श्लोक
तथेति शनकै राजन्महाभागवतोऽर्भक: ।
उपेत्य भुवि कायेन ननाम विधृताञ्जलि: ॥ ४ ॥
 
शब्दार्थ
तथा—ऐसा ही हो; इति—इस प्रकार ब्रह्माजी के वचनों को मानकर; शनकै:—धीरे-धीरे; राजन्—हे राजा (युधिष्ठिर); महा भागवत:—अत्यन्त महान् भक्त (प्रह्लाद महाराज); अर्भक:—यद्यपि छोटे बालक ही थे; उपेत्य—धीरे-धीरे निकट जाकर; भुवि—पृथ्वी पर; कायेन—अपने शरीर से; ननाम—प्रणाम किया; विधृत-अञ्जलि:—हाथ जोड़े हुए ।.
 
अनुवाद
 
 नारद मुनि ने आगे कहा : हे राजा, यद्यपि महान् भक्त प्रह्लाद महाराज केवल छोटे से बालक थे, लेकिन उन्होंने ब्रह्माजी की बातें मान लीं। वे धीरे-धीरे भगवान् नृसिंहदेव की ओर बढ़े और हाथ जोडक़र पृथ्वी पर गिर कर उन्हें सादर नमस्कार किया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥