श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 10: देवताओं तथा असुरों के बीच युद्ध  »  श्लोक 9

 
श्लोक
उष्ट्रै: केचिदिभै: केचिदपरे युयुधु: खरै: ।
केचिद्गौरमुखैरृक्षैर्द्वीपिभिर्हरिभिर्भटा: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
उष्ट्रै:—ऊँट की पीठ पर; केचित्—कुछ व्यक्ति; इभै:—हाथी की पीठ पर; केचित्—कुछ व्यक्ति; अपरे—अन्य; युयुधु:—युद्ध में लगे हुए; खरै:—गधों की पीठ पर; केचित्—कुछ व्यक्ति; गौर-मुखै:—सफेद मुँह वाले बन्दरों पर; ऋक्षै:—लाल मुँह वाले बन्दरों (रीछों) पर; द्वीपिभि:—बाघों की पीठ पर; हरिभि:—सिंहों की पीठ पर; भटा:—सारे सैनिक ।.
 
अनुवाद
 
 कुछ सैनिक ऊँटों पर, कुछ हाथियों पर, कुछ गधों पर, कुछ सफेद मुँह वाले और लाल मुँह वाले बन्दरों पर, कुछ बाघों पर और कुछ सिंहों पर सवार होकर लडऩे लगे। इस प्रकार वे सब युद्ध में लगे थे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥