श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 11: इन्द्र द्वारा असुरों का संहार  »  श्लोक 9

 
श्लोक
न वयं मन्यमानानामात्मानं तत्र साधनम् ।
गिरो व: साधुशोच्यानां गृह्णीमो मर्मताडना: ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
न—नहीं; वयम्—हम; मन्यमानानाम्—मानने वालों का; आत्मानम्—स्वयं; तत्र—विजय या हार में; साधनम्—कारण; गिर:—शब्द; व:—तुम्हारा; साधु-शोच्यानाम्—जिन पर साधु पुरुषों को तरस आता है; गृह्णीम:—स्वीकार करते हैं; मर्म ताडना:—हृदय को पीड़ा पहुँचाने वाले ।.
 
अनुवाद
 
 तुम देवता लोग अपने आपको अपनी ख्याति तथा विजय प्राप्त करने का कारण मानते हो। तुम लोगों की अज्ञानता के कारण साधु पुरुष तुम्हारे लिए शोक करते हैं। अतएव तुम्हारे वचन मर्मस्पर्शी होते हुए भी हमें स्वीकार्य नहीं हैं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥