श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 12

 
श्लोक
तत्र देवा: सुतपसो विरजा अमृतप्रभा: ।
तेषां विरोचनसुतो बलिरिन्द्रो भविष्यति ॥ १२ ॥
 
शब्दार्थ
तत्र—उस मन्वन्तर में; देवा:—देवतागण; सुतपस:—सुतपा; विरजा:—विरजगण; अमृतप्रभा:—अमृत प्रभगण; तेषाम्—उनमें से; विरोचन-सुत:—विरोचन का पुत्र; बलि:—महाराज बलि; इन्द्र:—स्वर्ग का राजा; भविष्यति—होगा ।.
 
अनुवाद
 
 आठवें मन्वन्तर में सुतपा, विरज तथा अमृतप्रभगण देवता होंगे और विरोचन पुत्र बलि महाराज देवताओं के राजा इन्द्र होंगे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥