श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 23

 
श्लोक
विष्वक्सेनो विषूच्यां तु शम्भो: सख्यं करिष्यति ।
जात: स्वांशेन भगवान्गृहे विश्वसृजो विभु: ॥ २३ ॥
 
शब्दार्थ
विष्वक्सेन:—विष्वक्सेन; विषूच्याम्—विषूची के गर्भ में; तु—तब; शम्भो:—शम्भु को; सख्यम्—मित्रता; करिष्यति—करेगा; जात:—उत्पन्न होकर; स्व-अंशेन—अपने अंश से; भगवान्—भगवान्; गृहे—घर में; विश्वसृज:—विश्वसृष्टा का; विभु:— अत्यन्त शक्तिशाली भगवान् ।.
 
अनुवाद
 
 विश्वसृष्टा के घर में विषूची के गर्भ से भगवान् के स्वांश विष्वक्सेन के रूप में भगवान् अवतरित होंगे। वे शम्भु से मैत्री स्थापित करेंगे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥