श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 27

 
श्लोक
भविता रुद्रसावर्णी राजन्द्वादशमो मनु: ।
देववानुपदेवश्च देवश्रेष्ठादय: सुता: ॥ २७ ॥
 
शब्दार्थ
भविता—होगा; रुद्र-सावर्णि:—रुद्र सावर्णि; राजन्—हे राजा; द्वादशम:—बारहवाँ; मनु:—मनु; देववान्—देववान; उपदेव:—उपदेव; च—तथा; देवश्रेष्ठ—देवश्रेष्ठ; आदय:—इत्यादि; सुता:—मनु के पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजा! बारहवाँ मनु रुद्रसावर्णि कहलायेगा। देववान, उपदेव तथा देवश्रेष्ठ उसके पुत्र होंगे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥