श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 29

 
श्लोक
स्वधामाख्यो हरेरंश: साधयिष्यति तन्मनो: ।
अन्तरं सत्यसहस: सुनृताया: सुतो विभु: ॥ २९ ॥
 
शब्दार्थ
स्वधामा-आख्य:—स्वधामा नामक; हरे: अंश:—भगवान् का अंश अवतार; साधयिष्यति—शासन करेगा; तत्-मनो:—उस मनु के; अन्तरम्—मन्वन्तर; सत्यसहस:—सत्यसहा का; सुनृताया:—सुनृता का; सुत:—पुत्र; विभु:—अत्यन्त शक्तिशाली ।.
 
अनुवाद
 
 माता सुनृता तथा पिता सत्यसहा से भगवान् का अंशावतार स्वधामा उत्पन्न होगा। वह उस मन्वन्तर में शासन करेगा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥