श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 30

 
श्लोक
मनुस्त्रयोदशो भाव्यो देवसावर्णिरात्मवान् ।
चित्रसेनविचित्राद्या देवसावर्णिदेहजा: ॥ ३० ॥
 
शब्दार्थ
मनु:—मनु; त्रयोदश:—तेरहवाँ; भाव्य:—होगा; देव-सावर्णि:—देवसावर्णि; आत्मवान्—आध्यात्मिक ज्ञान में उन्नत; चित्रसेन—चित्रसेन; विचित्र-आद्या:—तथा विचित्र इत्यादि; देव-सावर्णि—देवसावर्णि के; देह-जा:—पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 तेरहवें मनु का नाम देवसावर्णि होगा और वह आध्यात्मिक ज्ञान में काफी बढ़ा-चढ़ा होगा। चित्रसेन तथा विचित्र उसके पुत्रों में से होंगे।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥