श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 6

 
श्लोक
अत्रापि भगवज्जन्म कश्यपाददितेरभूत् ।
आदित्यानामवरजो विष्णुर्वामनरूपधृक् ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
अत्र—इस मनु के शासन में; अपि—निश्चय ही; भगवत्-जन्म—भगवान् का प्राकट्य; कश्यपात्—कश्यप मुनि से; अदिते:— माता अदिति के; अभूत्—सम्भव हुआ; आदित्यानाम्—आदित्यों में से; अवर-ज:—सबसे छोटा; विष्णु:—साक्षात् विष्णु; वामन-रूप-धृक्—भगवान् वामन का रूप धारण करते हुए ।.
 
अनुवाद
 
 इस मन्वन्तर में भगवान् आदित्यों में सबसे छोटे, वामन के नाम से अवतरित हुए। उनके पिता कश्यप तथा माता अदिति थीं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥