श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 13: भावी मनुओं का वर्णन  »  श्लोक 9

 
श्लोक
तृतीयां वडवामेके तासां संज्ञासुतास्त्रय: ।
यमो यमी श्राद्धदेवश्छायायाश्च सुताञ्छृणु ॥ ९ ॥
 
शब्दार्थ
तृतीयाम्—तीसरी पत्नी; वडवाम्—वडवा को; एके—कुछ लोग; तासाम्—तीनों पत्नियों में से; संज्ञा-सुता: त्रय:—संज्ञा की तीन संतानें; यम:—एक पुत्र यम; यमी—पुत्री यमी; श्राद्धदेव:—दूसरा पुत्र श्राद्धदेव; छायाया:—छाया का; च—तथा; सुतान्—पुत्रों को; शृणु—सुनो ।.
 
अनुवाद
 
 ऐसा कहा जाता है कि सूर्यदेव के एक तीसरी पत्नी भी थी जिसका नाम वडवा था। इन तीनों पत्नियों में से संज्ञा के तीन संतानें हुईं—यम, यमी तथा श्राद्धदेव। अब मैं छाया की सन्तानों का वर्णन करूँगा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥