श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय  »  श्लोक 24

 
श्लोक
मघवांस्तमभिप्रेत्य बले: परममुद्यमम् ।
सर्वदेवगणोपेतो गुरुमेतदुवाच ह ॥ २४ ॥
 
शब्दार्थ
मघवान्—इन्द्र; तम्—स्थिति को; अभिप्रेत्य—समझकर; बले:—बलि महाराज के; परमम् उद्यमम्—महान् उत्साह; सर्व-देव- गण—सभी देवताओं द्वारा; उपेत:—साथ-साथ; गुरुम्—गुरु को; एतत्—निम्नलिखित शब्द; उवाच—कहा; ह—निस्सन्देह ।.
 
अनुवाद
 
 बलि महाराज के अथक प्रयास को देखकर तथा उसके मन्तव्य को समझकर राजा इन्द्र अन्य देवताओं के साथ अपने गुरु बृहस्पति के पास गये और इस प्रकार बोले।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥