श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय  »  श्लोक 25

 
श्लोक
भगवन्नुद्यमो भूयान्बलेर्न: पूर्ववैरिण: ।
अविषह्यमिमं मन्ये केनासीत्तेजसोर्जित: ॥ २५ ॥
 
शब्दार्थ
भगवन्—हे भगवान्; उद्यम:—उत्साह; भूयान्—महान्; बले:—बलि महाराज का; न:—हमारा; पूर्व-वैरिण:—पुराना शत्रु; अविषह्यम्—असह्य; इमम्—यह; मन्ये—मैं सोचता हूँ; केन—किसके द्वारा; आसीत्—पाया; तेजसा—तेज; ऊर्जित:—प्राप्त किया गया ।.
 
अनुवाद
 
 हे प्रभु! हमारे पुराने शत्रु बलि महाराज में अब नया उत्साह पैदा हो गया है और उसने ऐसी आश्चर्यजनक शक्ति प्राप्त कर ली है कि हमारा विचार है कि हम उसके तेज का शायद प्रतिरोध नहीं कर सकते।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥