श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 15: बलि महाराज द्वारा स्वर्गलोक पर विजय  »  श्लोक 27

 
श्लोक
ब्रूहि कारणमेतस्य दुर्धर्षत्वस्य मद्रिपो: ।
ओज: सहो बलं तेजो यत एतत्समुद्यम: ॥ २७ ॥
 
शब्दार्थ
ब्रूहि—कृपा करके हमें बतायें; कारणम्—कारण; एतस्य—इसका; दुर्धर्षत्वस्य—दुर्धर्षता का; मत्-रिपो:—मेरे शत्रु का; ओज:—पराक्रम; सह:—शक्ति; बलम्—बल; तेज:—प्रभाव; यत:—जहाँ से; एतत्—यह सब; समुद्यम:—प्रयास ।.
 
अनुवाद
 
 कृपया मुझे बतायें कि बलि महाराज की शक्ति, उद्यम, प्रभाव तथा विजय का क्या कारण है? वह इतना उत्साही कैसे हो गया है?
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥