श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 17: भगवान् को अदिति का पुत्र बनना स्वीकार  »  श्लोक 19

 
श्लोक
उपधाव पतिं भद्रे प्रजापतिमकल्मषम् ।
मां च भावयती पत्यावेवंरूपमवस्थितम् ॥ १९ ॥
 
शब्दार्थ
उपधाव—जाकर पूजा करो; पतिम्—अपने पति की; भद्रे—हे भद्र स्त्री; प्रजापतिम्—जो प्रजापति है; अकल्मषम्—जो अपनी तपस्या के कारण अत्यधिक शुद्ध बन गया है; माम्—मुझको; च—भी; भावयती—मनन करती हुई; पत्यौ—अपने पति में; एवम्—इस प्रकार; रूपम्—रूप; अवस्थितम्—वहाँ पर स्थित ।.
 
अनुवाद
 
 तुम अपने पति कश्यप के शरीर के भीतर सदैव मुझे स्थित मानकर उनकी पूजा करो क्योंकि वे अपनी तपस्या से शुद्ध हो चुके हैं।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥