श्रीमद् भागवतम
 
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 2: गजेन्द्र का संकट  »  श्लोक 9-13
 
 
श्लोक
तस्य द्रोण्यां भगवतो वरुणस्य महात्मन: ।
उद्यानमृतुमन्नाम आक्रीडं सुरयोषिताम् ॥ ९ ॥
सर्वतोऽलङ्‌कृतं दिव्यैर्नित्यपुष्पफलद्रुमै: ।
मन्दारै: पारिजातैश्च पाटलाशोकचम्पकै: ॥ १० ॥
चूतै: पियालै: पनसैराम्रैराम्रातकैरपि ।
क्रमुकैर्नारिकेलैश्च खर्जूरैर्बीजपूरकै: ॥ ११ ॥
मधुकै: शालतालैश्च तमालैरसनार्जुनै: ।
अरिष्टोडुम्बरप्लक्षैर्वटै: किंशुकचन्दनै: ॥ १२ ॥
पिचुमर्दै: कोविदारै: सरलै: सुरदारुभि: ।
द्राक्षेक्षुरम्भाजम्बुभिर्बदर्यक्षाभयामलै: ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
तस्य—उस पर्वत (त्रिकूट) की; द्रोण्याम्—घाटी में; भगवत:—महापुरुष; वरुणस्य—वरुण देव का; महा-आत्मन:—भगवान् का महान् भक्त; उद्यानम्—बगीचा; ऋतुमत्—ऋतुमत; नाम—नामक; आक्रीडम्—आमोद-प्रमोद का स्थान; सुर-योषिताम्— देवताओं की स्त्रियों के; सर्वत:—सर्वत्र; अलङ्कृतम्—सुन्दर ढंग से सजाया हुआ; दिव्यै:—देवताओं से सम्बन्धित; नित्य— सदैव; पुष्प—फूलों; फल—तथा फलों के; द्रुमै:—वृक्षों से; मन्दारै:—मन्दार से; पारिजातै:—पारिजात से; च—भी; पाटल— पाटल; अशोक—अशोक; चम्पकै:—चम्पा से; चूतै:—आम के विशेष फलों से; पियालै:—पियाल फलों से; पनसै:—पनस फल से; आम्रै:—आमों से; आम्रातकै:—आम्रातक नामक खट्टे फलों से; अपि—भी; क्रमुकै:—क्रमुक फलों से; नारिकेलै:— नारियल वृक्षों से; च—तथा; खर्जूरै:—खजूर के वृक्षों से; बीजपूरकै:—अनारों से; मधुकै:—मधुक फलों से; शाल-तालै:— ताड़ फलों से; च—तथा; तमालै:—तमाल वृक्षों से; असन—असन वृक्ष; अर्जुनै:—अर्जुन वृक्षों से; अरिष्ट—अरिष्ट फलों से; उडुम्बर—उडुम्बर का बड़ा वृक्ष; प्लक्षै:—प्लक्ष वृक्ष से; वटै:—बरगद के पेड़ से; किंशुक—गंधविहीन लाल फूलों से; चन्दनै:—चंदन के वृक्षों से; पिचुमर्दै:—पिचुमर्द फूलों से; कोविदारै:—कोविदार फलों से; सरलै:—सरल वृक्षों से; सुर दारुभि:—सुर-दारु वृक्षों से; द्राक्षा—अंगूर; इक्षु:—गन्ना; रम्भा—केला; जम्बुभि:—जम्बु फलों से; बदरी—बदरी फल; अक्ष—अक्ष फल; अभय—अभय फल; आमलै:—आमलकी या आँवलों के फलों से ।.
 
अनुवाद
 
 त्रिकूट पर्वत की घाटी में ऋतुमत् नामक उद्यान था। यह उद्यान महान् भक्त वरुण का था और यह देवांगनाओं का क्रीड़ास्थल था। यहाँ सभी ऋतुओं में फूल-फल उगते रहते थे। इनमें से मन्दार, पारिजात, पाटल, अशोक, चम्पक, आम्रविशेष (चूत), पियाल, पनस, आम, आम्रातक, क्रमुक, नारियल, खजूर तथा अनार मुख्य थे। वहाँ पर मधुक, ताड़, तमाल, असन, अर्जुन, अरिष्ट, उडुम्बर, प्लक्ष, बरगद, किंशुक तथा चन्दन के वृक्ष थे। वहाँ पर पिचुमर्द, कोविदार, सरल, सुरदारु, अंगूर, गन्ना, केला, जम्बु, बदरी, अक्ष, अभय तथा आमलकी भी थे।
 
 
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