श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना  »  श्लोक 3

 
श्लोक
विभुरिन्द्र: सुरगणा राजन्भूतरयादय: ।
हिरण्यरोमा वेदशिरा ऊर्ध्वबाह्वादयो द्विजा: ॥ ३ ॥
 
शब्दार्थ
विभु:—विभु; इन्द्र:—स्वर्ग का राजा; सुर-गणा:—देवता; राजन्—हे राजा; भूतरय-आदय:—भूतरय आदि; हिरण्यरोमा— हिरण्यरोमा; वेदशिरा—वेदशिरा; ऊर्ध्वबाहु—ऊर्ध्वबाहु; आदय:—इत्यादि; द्विजा:—ब्राह्मण या सातों लोकों के ऋषि ।.
 
अनुवाद
 
 हे राजा! रैवत मनु के युग में स्वर्ग का राजा (इन्द्र) विभु था, देवताओं में भूतरय इत्यादि थे और सप्त लोकों के अधिपति सात ब्राह्मण हिरण्यरोमा, वेदशिरा तथा ऊर्ध्वबाहु इत्यादि थे।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥