श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना  »  श्लोक 4

 
श्लोक
पत्नी विकुण्ठा शुभ्रस्य वैकुण्ठै: सुरसत्तमै: ।
तयो: स्वकलया जज्ञे वैकुण्ठो भगवान्स्वयम् ॥ ४ ॥
 
शब्दार्थ
पत्नी—पत्नी; विकुण्ठा—विकुण्ठा नाम की; शुभ्रस्य—शुभ्र की; वैकुण्ठै:—वैकुण्ठों सहित; सुर-सत्-तमै:—देवताओं के साथ; तयो:—विकुण्ठा तथा शुभ्र से; स्व-कलया—स्वांश से; जज्ञे—प्रकट हुआ; वैकुण्ठ:—भगवान्; भगवान्—भगवान्; स्वयम्—साक्षात् ।.
 
अनुवाद
 
 शुभ्र तथा उसकी पत्नी विकुण्ठा के संयोग से भगवान् वैकुण्ठ अपने स्वांश देवताओं सहित प्रकट हुए।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥