श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 5: देवताओं द्वारा भगवान् से सुरक्षा याचना  »  श्लोक 6

 
श्लोक
तस्यानुभाव: कथितो गुणाश्च परमोदया: ।
भौमान्‍रेणून्स विममे यो विष्णोर्वर्णयेद् गुणान् ॥ ६ ॥
 
शब्दार्थ
तस्य—वैकुण्ठ के रूप में प्रकट होने वाले भगवान् को; अनुभाव:—महान् कार्यकलाप; कथित:—बताये जा चुके; गुणा:— दिव्य गुण; च—भी; परम-उदया:—अत्यन्त यशस्वी; भौमान्—पृथ्वी के; रेणून्—कण; स:—जो कोई; विममे—गिन सकता है; य:—ऐसा पुरुष; विष्णो:—विष्णु के; वर्णयेत्—गिन सकता है; गुणान्—दिव्य गुणों को ।.
 
अनुवाद
 
 यद्यपि भगवान् के विविध अवतारों के महान् कार्यों तथा दिव्य गुणों का अद्भुत रीति से वर्णन किया जाता है, किन्तु कभी-कभी हम उन्हें नहीं समझ पाते। किन्तु भगवान् विष्णु के लिए सब कुछ सम्भव है। यदि कोई ब्रह्माण्ड के सारे परमाणुओं को गिन सके तो वह भगवान् के गुणों की गणना कर सकता है। किन्तु ऐसा कर पाना सम्भव नहीं है। अत: कोई भी भगवान् के दिव्य गुणों को नहीं गिन सकता।
 
तात्पर्य
 इस प्रसंग में भगवान् के जिन यशस्वी कार्यों का उल्लेख है वे जय तथा विजय नामक उनके निजी अंगरक्षकों को सनक, सनातन, सनत्कुमार तथा सनन्दन महान् ऋषियों द्वारा शाप दिये जाने के बाद दैत्य बनने पर घटित हुए। जय को हिरण्याक्ष के रूप में वराहदेव से युद्ध करना पड़ा और इन्हीं वराहदेव का वर्णन रैवत कल्प के सम्बन्ध में किया जा रहा है। किन्तु यह युद्ध प्रथम मनु स्वायंभुव के शासनकाल में हुआ। अतएव कुछ विद्वानों के
अनुसार वराह दो हुए हैं। किन्तु अन्यों का मत है कि वराह स्वायंभुव मनु के राज्यकाल में प्रकट हुए और रैवत मनु के काल तक जल के भीतर रहते रहे। कुछ लोगों को सन्देह हो सकता है कि यह कैसे घटित हुआ होगा, किन्तु उत्तर यह है कि कुछ भी घटित हो सकता है। यदि कोई ब्रह्माण्ड के परमाणुओं की गणना कर ले तो वह भगवान् विष्णु के गुणों को गिन सकता है। किन्तु न तो कोई परमाणुओं को गिन सकता है और न भगवान् के दिव्य गुणों को ही।
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥