श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा  »  श्लोक 18

 
श्लोक
श्रीभगवानुवाच
हन्त ब्रह्मन्नहो शम्भो हे देवा मम भाषितम् ।
श‍ृणुतावहिता: सर्वे श्रेयो व: स्याद् यथा सुरा: ॥ १८ ॥
 
शब्दार्थ
श्री-भगवान् उवाच—भगवान् ने कहा; हन्त—उनको सम्बोधित करते हुए; ब्रह्मन् अहो—हे ब्रह्माजी; शम्भो—हे शिवजी; हे— हे; देवा:—देवतागण; मम—मेरा; भाषितम्—कथन; शृणुत—सुनो; अवहिता:—ध्यानपूर्वक; सर्वे—तुम सभी; श्रेय:— कल्याण; व:—तुम सबका; स्यात्—हो; यथा—जिस तरह; सुरा:—देवताओं के लिए ।.
 
अनुवाद
 
 भगवान् ने कहा! हे ब्रह्मा, शिव तथा अन्य देवताओ! तुम सभी ध्यानपूर्वक मेरी बात सुनो क्योंकि मैं जो कुछ कहूँगा उससे तुम सब का कल्याण होगा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥