श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 6: देवताओं तथा असुरों द्वारा सन्धि की घोषणा  »  श्लोक 27

 
श्लोक
अथ तस्मै भगवते नमस्कृत्य पितामह: ।
भवश्च जग्मतु: स्वं स्वं धामोपेयुर्बलिं सुरा: ॥ २७ ॥
 
शब्दार्थ
अथ—इसके बाद; तस्मै—उस; भगवते—भगवान् को; नमस्कृत्य—नमस्कार करके; पिता-मह:—ब्रह्माजी; भव: च—तथा शिवजी; जग्मतु:—लौट गये; स्वम् स्वम्—अपने-अपने; धाम—घरों को; उपेयु:—पास गये; बलिम्—राजा बलि के; सुरा:— अन्य सारे देवता ।.
 
अनुवाद
 
 तब भगवान् को सादर नमस्कार करने के बाद ब्रह्मा जी तथा शिवजी अपने-अपने धामों को लौट गये। फिर सारे देवता महाराज बलि के पास गये।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥