श्रीमद् भागवतम
शब्द आकार

भागवत पुराण  »  स्कन्ध 8: ब्रह्माण्डीय सृष्टि का निवर्तन  »  अध्याय 8: क्षीरसागर का मन्थन  »  श्लोक 32

 
श्लोक
दीर्घपीवरदोर्दण्ड: कम्बुग्रीवोऽरुणेक्षण: ।
श्यामलस्तरुण: स्रग्वी सर्वाभरणभूषित: ॥ ३२ ॥
 
शब्दार्थ
दीर्घ—लम्बा; पीवर—बलिष्ठ; दो:-दण्ड:—भुजाएँ; कम्बु—शंख के समान; ग्रीव:—गर्दन; अरुण-ईक्षण:—लाल-लाल आँखें; श्यामल:—काले रंग का; तरुण:—नौजवान; स्रग्वी—फूलों की माला पहने; सर्व—समस्त; आभरण—गहनों से; भूषित:—अलंकृत ।.
 
अनुवाद
 
 उसका शरीर सुदृढ़ था; उसकी भुजाएँ लम्बी तथा बलिष्ठ थीं; उसकी शंख जैसी गर्दन में तीन रेखाएँ थीं; उसकी आँखें लाल-लाल थीं और उसका रंग साँवला था। वह अत्यन्त तरुण था, उसके गले में फूलों की माला थी तथा उसका सारा शरीर नाना प्रकार के आभूषणों से सुसज्जित था।
 
____________________________
 
All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥