श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 19

 
श्लोक
निशम्य तद् वचस्तस्य भगवान् प्रपितामह: ।
होतुर्व्यतिक्रमं ज्ञात्वा बभाषे रविनन्दनम् ॥ १९ ॥
 
शब्दार्थ
निशम्य—सुनकर; तत् वच:—वे शब्द; तस्य—उसके (मनु के); भगवान्—अत्यन्त शक्तिशाली; प्रपितामह:—बाबा के बाबा वसिष्ठ; होतु: व्यतिक्रमम्—होता की त्रुटि; ज्ञात्वा—जानकर; बभाषे—बोला; रवि-नन्दनम्—सूर्यपुत्र वैवस्वत मनु से ।.
 
अनुवाद
 
 मनु के इन वचनों को सुनकर अत्यन्त शक्तिशाली प्रपितामह वसिष्ठ होता की त्रुटि को समझ गये। अत: वे सूर्यपुत्र से इस प्रकार बोले।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥