श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 1: राजा सुद्युम्न का स्त्री बनना  »  श्लोक 35

 
श्लोक
सापि तं चकमे सुभ्रू: सोमराजसुतं पतिम् ।
स तस्यां जनयामास पुरूरवसमात्मजम् ॥ ३५ ॥
 
शब्दार्थ
सा—सुद्युम्न जो स्त्री के रूप में था; अपि—भी; तम्—उसके साथ (बुध के साथ); चकमे—संभोग करना चाहा; सु-भ्रू:—परम सुन्दरी; सोमराज-सुतम्—चन्द्रमा के राजकुमार के साथ; पतिम्—अपने पति रूप में; स:—वह (बुध); तस्याम्—उसके गर्भ से; जनयाम् आस—उत्पन्न किया; पुरूरवसम्—पुरूरवा नामक; आत्म-जम्—पुत्र को ।.
 
अनुवाद
 
 उस सुन्दर स्त्री ने भी चन्द्रमा के राजकुमार बुध को अपना पति बनाना चाहा। इस तरह बुध ने उसके गर्भ से पुरूरवा नामक एक पुत्र उत्पन्न किया।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥