श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 11: भगवान् रामचन्द्र का विश्व पर राज्य करना  »  श्लोक 4

 
श्लोक
इत्ययं तदलङ्कारवासोभ्यामवशेषित: ।
तथा राज्ञ्यपि वैदेही सौमङ्गल्यावशेषिता ॥ ४ ॥
 
शब्दार्थ
इति—इस तरह से (ब्राह्मणों को सर्वस्व देने के बाद); अयम्—भगवान् रामचन्द्र; तत्—उनके; अलङ्कार-वासोभ्याम्—अपने निजी आभूषणों तथा वस्त्रों सहित; अवशेषित:—शेष; तथा—और; राज्ञी—रानी (सीतादेवी); अपि—भी; वैदेही—राजा विदेह की पुत्री; सौमङ्गल्या—केवल नथुनी से युक्त; अवशेषिता—शेष रही ।.
 
अनुवाद
 
 ब्राह्मणों को सर्वस्व दान देने के बाद भगवान् रामचन्द्र के पास केवल उनके निजी वस्त्र तथा आभूषण बचे रहे और इसी तरह रानी सीतादेवी के पास उनकी नथुनी के अतिरिक्त कुछ भी शेष नहीं रहा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥