श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 12: भगवान् रामचन्द्र के पुत्र कुश की वंशावली  »  श्लोक 13

 
श्लोक
बृहद्राजस्तु तस्यापि बर्हिस्तस्मात् कृतञ्जय: ।
रणञ्जयस्तस्य सुत: सञ्जयो भविता तत: ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
बृहद्राज:—बृहद्राज; तु—लेकिन; तस्य अपि—अमित्रजित का; बर्हि:—बर्हि; तस्मात्—बर्हि से; कृतञ्जय:—कृतञ्जय; रणञ्जय:— रणञ्जय; तस्य—कृतञ्जय का; सुत:—पुत्र; सञ्जय:—सञ्जय; भविता—होगा; तत:—रणञ्जय से ।.
 
अनुवाद
 
 अमित्रजित से बृहद्राज होगा, बृहद्राज से बर्हि, बर्हि से कृतञ्जय, कृतञ्जय से रणञ्जय और रणञ्जय से सञ्जय नामक पुत्र उत्पन्न होगा।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥