श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 12: भगवान् रामचन्द्र के पुत्र कुश की वंशावली  »  श्लोक 2

 
श्लोक
देवानीकस्ततोऽनीह: पारियात्रोऽथ तत्सुत: ।
ततो बलस्थलस्तस्माद् वज्रनाभोऽर्कसम्भव: ॥ २ ॥
 
शब्दार्थ
देवानीक:—देवानीक; तत:—क्षेमधन्वा से; अनीह:—देवानीक के पुत्र का नाम अनीह था; पारियात्र:—पारियात्र; अथ—तत्पश्चात्; तत्-सुत:—अनीह का पुत्र; तत:—पारियात्र से; बलस्थल:—बलस्थल; तस्मात्—बलस्थल से; वज्रनाभ:—वज्रनाभ; अर्क- सम्भव:—सूर्यदेव से उत्पन्न ।.
 
अनुवाद
 
 क्षेमधन्वा का पुत्र देवानीक था और देवानीक का पुत्र अनीह हुआ जिसके पुत्र का नाम पारियात्र था। पारियात्र का पुत्र बलस्थल था, जिसका पुत्र वज्रनाभ हुआ जो सूर्यदेव के तेज से उत्पन्न बतलाया जाता है।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥