श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 12: भगवान् रामचन्द्र के पुत्र कुश की वंशावली  »  श्लोक 5

 
श्लोक
पुष्पो हिरण्यनाभस्य ध्रुवसन्धिस्ततोऽभवत् ।
सुदर्शनोऽथाग्निवर्ण: शीघ्रस्तस्य मरु: सुत: ॥ ५ ॥
 
शब्दार्थ
पुष्प:—पुष्प; हिरण्यनाभस्य—हिरण्यनाभ का पुत्र; ध्रुवसन्धि:—ध्रुवसन्धि; तत:—उससे; अभवत्—उत्पन्न हुआ; सुदर्शन:—सुदर्शन; अथ—तत्पश्चात्; अग्निवर्ण:—सुदर्शन का पुत्र अग्निवर्ण; शीघ्र:—शीघ्र; तस्य—उसका; मरु:—मरु; सुत:—पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 हिरण्यनाभ के पुत्र का नाम पुष्प था जिससे ध्रुवसन्धि नामक पुत्र हुआ। ध्रुवसन्धि का पुत्र सुदर्शन और उसका पुत्र अग्निवर्ण था। अग्निवर्ण के पुत्र का नाम शीघ्र था और उसके पुत्र का नाम मरु था।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥