श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 13: महाराज निमि की वंशावली  »  श्लोक 15

 
श्लोक
तस्माद् बृहद्रथस्तस्य महावीर्य: सुधृत्पिता ।
सुधृतेर्धृष्टकेतुर्वै हर्यश्वोऽथ मरुस्तत: ॥ १५ ॥
 
शब्दार्थ
तस्मात्—देवरात से; बृहद्रथ:—बृहद्रथ; तस्य—उसका; महावीर्य:—महावीर्य; सुधृत्-पिता—सुधृति का पिता बना; सुधृते:—सुधृति से; धृष्टकेतु:—धृष्टकेतु; वै—निस्सन्देह; हर्यश्व:—हर्यश्व; अथ—तत्पश्चात्; मरु:—मरु; तत:—उसके बाद ।.
 
अनुवाद
 
 देवरात से बृहद्रथ नामक पुत्र हुआ और बृहद्रथ का पुत्र महावीर्य हुआ जो सुधृति का पिता बना। सुधृति का पुत्र धृष्टकेतु कहलाया और धृष्टकेतु से हर्यश्व हुआ। हर्यश्व का पुत्र मरु हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥