श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 13: महाराज निमि की वंशावली  »  श्लोक 22

 
श्लोक
शुचिस्तुतनयस्तस्मात् सनद्वाज: सुतोऽभवत् ।
ऊर्जकेतु: सनद्वाजादजोऽथ पुरुजित्सुत: ॥ २२ ॥
 
शब्दार्थ
शुचि:—शुचि; तु—लेकिन; तनय:—पुत्र; तस्मात्—उससे; सनद्वाज:—सनद्वाज; सुत:—पुत्र; अभवत्—पैदा हुआ; ऊर्जकेतु:— ऊर्जकेतु; सनद्वाजात्—सनद्वाज से; अज:—अज; अथ—तत्पश्चात्; पुरुजित्—पुरुजित; सुत:—पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 शतद्युम्न के पुत्र का नाम शुचि था। शुचि से सनद्वाज उत्पन्न हुआ और सनद्वाज का पुत्र ऊर्जकेतु था। ऊर्जकेतु का पुत्र अज था और अज का पुत्र पुरुजित हुआ।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥