श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 13: महाराज निमि की वंशावली  »  श्लोक 25

 
श्लोक
वस्वनन्तोऽथ तत्पुत्रो युयुधो यत् सुभाषण: ।
श्रुतस्ततो जयस्तस्माद् विजयोऽस्माद‍ृत: सुत: ॥ २५ ॥
 
शब्दार्थ
वस्वनन्त:—वस्वनन्त; अथ—तत्पश्चात्; तत्-पुत्र:—उसका पुत्र; युयुध:—युयुध नामक; यत्—जिससे; सुभाषण:—सुभाषण; श्रुत: तत:—तथा उससे श्रुत हुआ; जय: तस्मात्—उससे जय हुआ; विजय:—विजय; अस्मात्—जय से; ऋत:—ऋत; सुत:—पुत्र ।.
 
अनुवाद
 
 उपगुप्त का पुत्र वस्वनन्त था, जिसका पुत्र युयुध हुआ। युयुध का पुत्र सुभाषण, सुभाषण का पुत्र श्रुत, श्रुत का पुत्र जय और जय का पुत्र विजय था। विजय का पुत्र ऋत था।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥