श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 14: पुरुरवा का उर्वशी पर मोहित होना  »  श्लोक 11

 
श्लोक
ममायं न तवेत्युच्चैस्तस्मिन् विवदमानयो: ।
पप्रच्छुऋर्षयो देवा नैवोचे व्रीडिता तु सा ॥ ११ ॥
 
शब्दार्थ
मम—मेरा; अयम्—यह (पुत्र); न—नहीं; तव—तुम्हारा; इति—इस प्रकार; उच्चै:—उच्चस्वर से; तस्मिन्—बालक के लिए; विवदमानयो:—दो दलों के झगडऩे पर; पप्रच्छु:—पूछा (तारा से); ऋषय:—ऋषियों ने; देवा:—सारे देवताओं ने; न—नहीं; एव— निस्सन्देह; उचे—कुछ कहा; व्रीडिता—लाजवश; तु—निस्सन्देह; सा—तारा ने ।.
 
अनुवाद
 
 फिर से बृहस्पति और सोम के बीच झगड़ा होने लगा क्योंकि दोनों दावा कर रहे थे, “यह मेरा पुत्र है, तुम्हारा नहीं है।” वहाँ पर उपस्थित सारे ऋषियों तथा देवताओं ने तारा से पूछा कि यह नवजात शिशु वास्तव में किसका है, किन्तु वह लज्जित होने के कारण तुरन्त कुछ भी उत्तर न दे पाई।
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥