श्रीमद् भागवतम
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भागवत पुराण  »  स्कन्ध 9: मुक्ति  »  अध्याय 16: भगवान् परशुराम द्वारा विश्व के क्षत्रियों का विनाश  »  श्लोक 13

 
श्लोक
रेणुका दु:खशोकार्ता निघ्नन्त्यात्मानमात्मना ।
राम रामेति तातेति विचुक्रोशोच्चकै: सती ॥ १३ ॥
 
शब्दार्थ
रेणुका—जमदग्नि-पत्नी रेणुका; दु:ख-शोक-अर्ता—(अपने पति की मृत्यु के) शोक से अत्यन्त दुखी; निघ्नन्ती—पीटते हुए; आत्मानम्—अपने शरीर को; आत्मना—स्वयं; राम—हे परशुराम; राम—हे परशुराम; इति—इस प्रकार; तात—हे पुत्र; इति—इस प्रकार; विचुक्रोश—रोने लगी; उच्चकै:—जोर जोर से; सती—वह सती स्त्री ।.
 
अनुवाद
 
 अपने पति की मृत्यु के कारण शोक से विलाप करती सती रेणुका अपने ही हाथों से अपने शरीर को पीट रही थी और जोर जोर से चिल्ला रही थी, “हे राम, मेरे पुत्र राम।”
 
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All glories to saints and sages of the Supreme Lord
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥